रविवार, 27 जुलाई 2014




बुंदेली समाज  

బొందిలి సమాజ్  BONDILI SAMAAJ


बुन्देली समाज में आप सभी का हार्दिक स्वागत है ।  मैं  जयशंकर प्रसाद तिवारी समाज के सभी सदस्यों की ओर से आप सभी को दशहरा व दीपावली की मंगलमय शुभकामनाएँ । 

बुधवार, 15 जनवरी 2014

सोमवार, 6 जनवरी 2014

दशहरा मिलन के आयोजन के अवसर पर संपन्न बुंदेली समाज कार्यक्रम

బొందిలి సమాజ్ बुंदेली समाज BONDILI SAMAAJ

दशहरा मिलन के आयोजन के अवसर पर संपन्न बुंदेली समाज कार्यक्रम               



































दशहरा मिलन के अवसर पर बोंदिली समाज के प्रतिभावान छात्रों को पुरस्कृत किया गया । इस अवसर पर अखिल भारतीय कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासभा एवं दक्षिण भारत  कान्यकुब्ज सभा के अध्यक्ष महोदय डॉ रामकुमार तिवारी जी तथा बोंदिली सेवा समिति के अध्यक्ष महोदय श्री सत्यनारायण प्रसाद तिवारी जी  को मुख्य अतिथियों के रूप में आमंत्रित किया गया । इस अवसर पर दक्षिण भारत  कान्यकुब्ज सभा के महासचिव श्री विजयपाल पांडे जी भी उपस्थित रहे । बोंदिली समाज के कार्यकारिणी सदस्य श्री बाला प्रसाद तिवारी ,जयशंकर प्रसाद तिवारी ,श्रीमती शोभा पांडे , श्री चंद्रशेखर तिवारी, श्री मधुसूदन शुक्ला , श्री आनंद प्रसाद तिवारी , श्री नारायण प्रसाद तिवारी , श्रीमती विजय लक्ष्मी शुक्ला , श्रीमती मीना तिवारी , श्रीमती रेणुका मिश्रा , सु श्री अरुणा दुबे , श्रीमती राजश्री शर्मा इत्यादि ।   

शनिवार, 7 दिसंबर 2013






 बुंदेली समाज [బొందిలి సమాజ్] [ BONDILI SAMAAJ] 

      जहां तक बुन्देली शब्द का शाब्दिक अर्थ स्पष्ट ही है कि बुंदेलखंड क्षेत्र से भारत के अनेक प्रान्तों में सिपाही या अन्य व्यवसाय से जुड़े तथा विशेषकर सिपाही के रूप में, पधारे, अनेक[धर्मों ] वर्ण के [अधिक संख्या में ]लोगों ने अपनी सेवाएँ प्रदान कीं । संबन्धित प्रान्तों के क्षेत्रीय भाषाओं के उच्चारण के प्रभाव से कई प्रान्तों में इन अन्तर्देशीय प्रवासी उत्तरभारतियों को दक्षिण भारत में बोंदिली के नाम से जाना जाता है । 
अस्तित्व को बनाए रखते हुए बोंदिली ब्राह्मण के रूप में प्रसिद्ध हैं । 
यह  समाज  पुरानी  परंपराओं  को  निभाते हुए  स्थानीय  जीवन  शैली को  अपनाकर अपना अलग अस्थित्व  व अलग पहचान के साथ  दक्षिण  में बोंदिली के नाम से  जाने जाते हैं ।

मंगलवार, 3 दिसंबर 2013



Historians believe that Tiwaris 

were traditional  researchers, warriors and 


farmers sometimes with  

strong connection with the 

original Indo-European which inhabited 

the Great Gangetic plains. Tiwari is 

the degree of the premier Brahmans and 

found in various Brahmans societies like Saryupareen 

Brahmans Kanyakubja Brahmans,Maithil Brahmans, Bhu

mihar Brahmans Bhrigu Vanshiya Brahmans and other    

Brahmans communities .